ग्रंथसार
क्या कभी आपने सोचा है कि सैकड़ों कंठों से निकलता एक स्वर, कैसे पत्थर जैसे हृदय में भक्ति का अंकुर फूंक देता है?
भक्ति साधना · पाठ 4
कीर्तन और सामूहिक गायन