ग्रंथसार
क्या भक्ति केवल मंदिर की देहरी तक सीमित है, या यह सांसों की तरह अनवरत चलने वाली एक सहज यात्रा है?
भक्ति साधना · पाठ 7
दिनभर का स्मरण