ग्रंथसार
आँसुओं की खारी बूँदें जब हृदय की आग से तपकर मोती बन जाती हैं, तभी प्रेम का दिव्य सागर हिलोरें लेने लगता है।
भक्ति साधना · पाठ 9
आँसू और विरह