ग्रंथसार
जब ध्यान की गहराई में उतरकर साधक स्वयं को भूल जाता है, तब वह चेतना के उस शिखर पर पहुँचता है जहाँ केवल आनंद ही आनंद है।
ध्यान साधना · पाठ 6
ध्यान से समाधि तक