ग्रंथसार
एक भक्त के हाथ में घूमती माला केवल मनकों की एक लड़ी नहीं, बल्कि ईश्वर से जुड़ने का एक पावन सेतु है।
जप और नाम स्मरण · पाठ 5
माला और जप की विधि