ग्रंथसार
हमारी हर आती-जाती साँस एक मौन प्रार्थना है, एक अनजाना मंत्र है जो हमारा हृदय अनवरत गाता रहता है।
प्राणायाम और श्वास · पाठ 6
श्वास में ईश्वर स्मरण