ग्रंथसार
जैसे-जैसे सूर्यदेव अपनी अंतिम किरणें समेटते हैं, एक दिव्य वातावरण बनने लगता है, जो संध्या की आरती के लिए हृदय को तैयार करता है।
संध्या और नित्य उपासना · पाठ 6
संध्या की आरती