ग्रंथसार
एक बार भगवान श्रीकृष्ण ने अपने प्रिय उद्धव जी से बड़े ही प्रेम से कहा कि सत्संग मुझे जिस प्रकार अपने वश में कर लेता है, वैसा और कोई साधन नहीं कर सकता।
सत्संग और स्वाध्याय · पाठ 1
सत्संग की महिमा