ग्रंथसार
महर्षि वेदव्यास के मन में एक गहरा असंतोष था, जिसका कारण स्वयं देवर्षि नारद ने अपनी ही कथा सुनाकर समझाया।
सत्संग और स्वाध्याय · पाठ 2
नारद जी का पूर्वजन्म