ग्रंथसार
स्वाध्याय की साधना साधक को शब्द से अनुभूति तक ले जाती है, जहाँ उसे अपने इष्ट-देवता का सान्निध्य प्राप्त होता है।
सत्संग और स्वाध्याय · पाठ 3
स्वाध्याय: इष्ट-देवता से संवाद