ग्रंथसार
एक बालक की आँखों में ज्ञान की ऐसी प्यास थी कि उसने मृत्यु के देवता को ही अपना गुरु बना लिया।
सत्संग और स्वाध्याय · पाठ 4
नचिकेता और गुरु