ग्रंथसार
गुरुदेव की कुटिया में दीप जलते ही देवरात को वह सूत्र मिल गया, जिससे जीवन का हर साधारण कार्य भी एक महा-अनुष्ठान बन जाता है।
गाणपत्य सम्प्रदाय · पाठ 3
हर अनुष्ठान का शुभारंभ