ग्रंथसार
क्या विघ्नहर्ता की कृपा केवल बाहरी पूजा तक सीमित है, या वह हमारे भीतर के विवेक का ही दूसरा नाम है?
गाणपत्य सम्प्रदाय · पाठ 8
गाणपत्य मार्ग का सार