ग्रंथसार
क्या संसार के कोलाहल में भी मौन की साधना संभव है, या संन्यास ही ईश्वर तक पहुँचने का एकमात्र द्वार है?
शैव सम्प्रदाय · पाठ 3
योगी और गृहस्थ: दोनों पथ