ग्रंथसार
शिव की अनंत धाराओं को समझना मानो एक विशाल नदी के अनेक उप-प्रवाहों को समझने जैसा है, जहाँ हर धारा अंततः उसी सागर में विलीन होती है।
शैव सम्प्रदाय · पाठ 4
शैव सम्प्रदाय और उनकी धाराएं