ग्रंथसार
क्या व्रत का अर्थ केवल देह को तपाना है, या यह शिवत्व की ओर जाने का कोई गुप्त मार्ग है?
शैव सम्प्रदाय · पाठ 6
पवित्र रातें और व्रत: तप और श्रद्धा का मिलन