ग्रंथसार
गुरु की अनुकंपा ही वह सेतु है जो मनुष्य के भीतर छिपे शिवत्व को जाग्रत कर उसे अनंत की यात्रा पर ले जाती है।
शैव सम्प्रदाय · पाठ 9
परंपरा के संवाहक: गुरु और आचार्य