ग्रंथसार
शक्ति की आराधना मात्र बाहरी अनुष्ठान नहीं, अपितु जीवन के कण-कण में दिव्यता को उतारने की एक मौन साधना है।
शाक्त सम्प्रदाय · पाठ 10
शक्ति साधना का नैतिक स्वरूप