ग्रंथसार
गुरुदेव की शीतल छाया में बैठकर देवरात ने वह प्रश्न पूछा जो सदा से जिज्ञासु मन को उद्वेलित करता आया है—'क्या माँ के ये हज़ारों रूप केवल कल्पना हैं या जीवन का कोई गहरा सत्य?'
शाक्त सम्प्रदाय · पाठ 2
देवी के विविध रूप और अर्थ