ग्रंथसार
क्या माँ और संतान का प्रेम ही वह एकमात्र मार्ग है, जो साधना की जटिलताओं को सरलता की शीतल छाया में बदल देता है?
शाक्त सम्प्रदाय · पाठ 8
माँ और संतान का पावन संबंध