ग्रंथसार
नित्य कर्मों का पालन केवल अनुष्ठान नहीं, अपितु स्वयं के अस्तित्व को ब्रह्मांडीय लय के साथ जोड़ने का एक पावन मार्ग है।
स्मार्त सम्प्रदाय · पाठ 4
नित्य कर्म और संध्या