ग्रंथसार
गुरु की अनुकम्पा ही वह सूत्र है जो हमारे तुच्छ जीवन को अनादि काल की ज्ञान-गंगा से जोड़ देती है।
स्मार्त सम्प्रदाय · पाठ 7
गुरु-परंपरा का स्मरण