ग्रंथसार
ज्ञान का दीप केवल पुस्तकों में नहीं, अपितु उसे भीतर उतारने की निरंतर साधना में जलता है।
स्मार्त सम्प्रदाय · पाठ 8
स्वाध्याय और वाचन