ग्रंथसार
मंदिर केवल पत्थरों का ढांचा नहीं, बल्कि मनुष्य की ईश्वर से मिलन की अनंत चाह का भौतिक स्वरूप है।
मंदिर और कला · पाठ 1
मंदिर: एक लौकिक निवास