ग्रंथसार
मंदिर केवल पत्थरों का ढांचा नहीं, बल्कि आत्मा और संस्कृति का एक जीता-जागता स्पंदन है।
मंदिर और कला · पाठ 10
मंदिर: वास्तु, कला और जीवंत समुदाय का संगम