ग्रंथसार
मंदिर केवल पत्थरों की संरचना नहीं, बल्कि समाज के स्पंदन का केंद्र है जो सबको एक सूत्र में पिरोता है।
मंदिर और कला · पाठ 4
मंदिर: समुदाय का केंद्र