ग्रंथसार
दूसरों के हाथ में कुछ सौंपना केवल वस्तु का दान नहीं, बल्कि स्वयं के भीतर से अहंकार को विदा करने की एक साधना है।
समाज और सेवा · पाठ 1
दान का पावन अर्थ