ग्रंथसार
जब हम किसी पीड़ित के आंसू पोंछते हैं, तो हम वास्तव में उस परमात्मा की पूजा कर रहे होते हैं जो हर हृदय में धड़कता है।
समाज और सेवा · पाठ 2
सेवा ही उपासना है