ग्रंथसार
अन्न केवल पेट की भूख नहीं मिटाता, बल्कि यह उस साझी मेज को भी बनाता है जहाँ मनुष्य अपनी मानवता को पुनर्जीवित करता है।
समाज और सेवा · पाठ 3
अन्नदान और भोजनालय की महिमा