ग्रंथसार
सृष्टि के कण-कण में बसे प्राणों की रक्षा करना ही वास्तव में ईश्वर की सच्ची सेवा है।
समाज और सेवा · पाठ 4
जीव-जंतु और जल का संरक्षण