ग्रंथसार
परंपरा कोई पुरानी जंजीर नहीं, जिसे हम ढोते रहें, बल्कि यह वह नींव है जिस पर हम अपने आज के कर्मों का महल खड़ा करते हैं।
समाज और सेवा · पाठ 9
आज के समय में परंपरा का ईमानदार निर्वाह