ग्रंथसार
जब कलाकार की साधना पूर्ण होती है, तो उसका सृजन केवल प्रदर्शन नहीं, बल्कि ईश्वर के चरणों में रखा गया एक पावन पुष्प बन जाता है।
संगीत और नृत्य · पाठ 10
कला का समर्पण