ग्रंथसार
जब देह की गति आत्मा की तरंगों के साथ ताल मिलाती है, तो नृत्य साक्षात प्रार्थना बन जाता है।
संगीत और नृत्य · पाठ 5
शास्त्रीय नृत्य: भक्ति का एक रूप