ग्रंथसार
विवाह के उपरान्त भी श्री आनन्दमयी माँ की आंतरिक अवस्था आनंद में डूबी हुई, स्वयं में स्थित बनी रही।
श्री आनन्दमयी माँ · पाठ 3
एक अलौकिक वैवाहिक जीवन