ग्रंथसार
एक पति ने अपनी पत्नी को ही अपना आध्यात्मिक गुरु मान लिया, यह भारतीय संत परम्परा का एक अनूठा अध्याय है।
श्री आनन्दमयी माँ · पाठ 6
भोलानाथ जी की स्वीकृति