ग्रंथसार
कबीर की वाणी में वह धार है जो बाह्य आडंबरों को काटकर आत्मा के सीधे मार्ग को उजागर कर देती है।
भक्ति संत · पाठ 2
कबीर और जुलाहे का सत्य