ग्रंथसार
रैदास ने यह उद्घोष किया कि ईश्वर के दरबार में जन्म नहीं, बल्कि हृदय की पवित्रता ही ऊँचाई का एकमात्र मापदंड है।
भक्ति संत · पाठ 6
रैदास और श्रम की गरिमा