ग्रंथसार
संत तुकाराम ने भक्ति को केवल मंदिरों की दीवारों तक सीमित न रखकर उसे जन-जन के खेतों और घरों का आंगन बना दिया।
भक्ति संत · पाठ 8
तुकाराम और जन-सामान्य की वाणी