ग्रंथसार
गुरु नानक देव जी ने बड़ी सरलता से लोगों को समझाया कि ईश्वर किसी एक दिशा या स्थान में सीमित नहीं है, वह तो सर्वव्यापी है।
गुरु नानक देव · पाठ 5
हरिद्वार और मक्का की यात्रा