ग्रंथसार
गुरु का अंतिम उपहार शिष्य को स्वयं के भीतर स्थित उस अनंत प्रकाश से परिचय कराना है जो उसे फिर किसी और का मुखापेक्षी नहीं रहने देता।
गुरु तत्व · पाठ 10
साधना में आत्मनिर्भरता