ग्रंथसार
सेवा का अर्थ केवल कर्म करना नहीं, बल्कि अपने अहंकार को मिटाने का एक विनम्र प्रयास है।
गुरु तत्व · पाठ 5
सेवा: सीखने का एक मार्ग