ग्रंथसार
संत तुकाराम जी की भक्ति और उनके अभंगों की कीर्ति जैसे-जैसे फैल रही थी, वैसे-वैसे कुछ पारंपरिक विद्वानों के मन में विरोध भी बढ़ रहा था।
ज्ञानेश्वर और तुकाराम · पाठ 6
इंद्रायणी ने लौटाए अभंग