ग्रंथसार
राजमहलों के वैभव के बीच, मीराबाई का जीवन एक अलग ही दिशा ले चुका था, जहाँ साधु-संतों की संगति ही उनका सच्चा दरबार था।
मीराबाई · पाठ 4
सत्संग और पावन नृत्य