ग्रंथसार
यह कथा है एक ऐसे पवित्र ब्राह्मण कुल में जन्मे बालक की, जिनका मन बचपन से ही सांसारिक मोह से परे, वैराग्य के मार्ग की ओर आकर्षित था।
श्री प्रेमानन्द जी महाराज · पाठ 2
एक विलक्षण बालक