ग्रंथसार
कठोर तप और वैराग्य में डूबे उस युवा संन्यासी के जीवन में भक्ति की वह मधुर बयार कहाँ से आई, जो उन्हें एक नई दिशा की ओर ले जाने वाली थी?
श्री प्रेमानन्द जी महाराज · पाठ 4
गंगा तट पर तपस्या के वर्ष