ग्रंथसार
उनका जीवन दिखाता है कि शरीर का कष्ट आत्मा की भगवद्-निष्ठा को कभी डिगा नहीं सकता।
श्री प्रेमानन्द जी महाराज · पाठ 7
रोग और निष्ठा