ग्रंथसार
जब साधारण मनुष्य अपने जीवन की उलझनों की गठरी लेकर उनके सम्मुख आता है, तब श्री प्रेमानन्द जी महाराज उसे करुणा और स्पष्टता से मार्ग दिखाते हैं।
श्री प्रेमानन्द जी महाराज · पाठ 8
एकांतिक वार्तालाप