ग्रंथसार
श्री प्रेमानन्द जी महाराज की शिक्षा का सार सांसारिक जीवन में रहते हुए भी आध्यात्मिक उन्नति के व्यावहारिक सूत्रों में छिपा है।
श्री प्रेमानन्द जी महाराज · पाठ 9
विनम्रता, आचरण की शुद्धि और कर्तव्य-निष्ठा