ग्रंथसार
दक्षिणेश्वर के मंदिर में युवा गदाधर के लिए माँ भवतारिणी की पत्थर की मूर्ति केवल पत्थर नहीं थी, बल्कि साक्षात् जीवित माँ थीं।
श्री रामकृष्ण परमहंस · पाठ 3
माँ काली का दिव्य दर्शन