ग्रंथसार
महर्षि के गहरे मौन से वह अमर देशना प्रकट हुई, जिसे आज संसार ‘मैं कौन हूँ?’ के नाम से जानता है।
भगवान श्री रमण महर्षि · पाठ 7
‘मैं कौन हूँ?’ — देशना का प्राकट्य